विश्व मानक पे भारत खुद को स्थापित करना चाहता हे पर विश्व मानक पर खड़ा नहीं उतरना चाहता है । यह समस्या सिर्फ यहाँ की नीति के कारण सत्तर सालों से घटित हो रहा है । यहाँ के प्रकृति के साथ पूर्णतः चीड़हरण किया जा रहा हे जो यहाँ की सरकार भी चंद सिक्कों पे आँखें बंद कर बैठी है । न्याय हे जो सही समय पर नहीं मिलता नीति हे जो पन्नों तक सीमित है । प्रतिनीधि को भारत का नहीं बल्कि यहाँ का धन संपदा कैसे लूटा जाय हमेशा ऐसी नीति बनाते हैं । प्रकृति के साथ क्रूर व्यवहार किया जा रहा है । पहाड़ो का दोहण नदियों का दोहण जंगलों का दोहण साथ में किसानों के जमीन का दोहण । क्या कोई ऐसी व्यवस्था है जिसके अंतर्गत इन सभी चीजों को संरक्षित किया जा सकता हो अगर हो तो सहायता करें ।
भारत की आवाज



